यह पृष्ठ सुविधा के लिए प्रदान किया गया अनुवाद है। अंग्रेज़ी संस्करण प्रामाणिक है। अंग्रेज़ी में पढ़ें

CSDR प्रतिभागी प्रकटीकरण

CSDR के अनुच्छेद 38(5) और 38(6) के अंतर्गत सहभागी प्रकटीकरण

1. परिचय

इस साइट का उद्देश्य यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (EEA) के भीतर केंद्रीय प्रतिभूति डिपॉज़िटरी (CSDs) के पास ग्राहकों के लिए सीधे धारित प्रतिभूतियों के संबंध में पृथक्करण के विभिन्न स्तरों से जुड़े संरक्षण स्तरों को प्रकट करना है, जिसमें पृथक्करण के संबंधित स्तरों के प्रमुख विधिक निहितार्थों तथा लागू दिवालियापन विधि की जानकारी का विवरण शामिल है।

यह प्रकटीकरण EEA में स्थापित CSD के संबंध में केंद्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार विनियमन (CSDR) के अनुच्छेद 38(5) और 38(6) के अंतर्गत आवश्यक है।

यह दस्तावेज़ कानूनी या अन्य सलाह का गठन करने के लिए अभिप्रेत नहीं है और इस पर उसी रूप में निर्भर नहीं किया जाना चाहिए। यदि आपको यहाँ वर्णित विषयों पर किसी मार्गदर्शन की आवश्यकता हो, तो आपको अपनी स्वयं की कानूनी सलाह लेनी चाहिए।

IFB ("बैंक") को कोमोरोस संघ के अंजुआन में वित्तीय संस्थान के रूप में लाइसेंस प्राप्त है। IFB स्वयं EEA CSD का सहभागी नहीं है; वह ग्राहकों की प्रतिभूतियाँ उन कॉरेस्पोंडेंट एवं कस्टोडियन बैंकों के माध्यम से धारण करता है जो सहभागी हैं। यह प्रकटीकरण इस शृंखला में उपलब्ध पृथक्करण विकल्पों का वर्णन करता है। CSDR के अनुच्छेद 38(5) और 38(6) के अनुसार, ऐसे CSD का सहभागी अपने ग्राहकों को कम से कम सामूहिक (ऑम्निबस) ग्राहक पृथक्करण और व्यक्तिगत ग्राहक पृथक्करण के बीच चयन का विकल्प उपलब्ध कराएगा तथा उन्हें प्रत्येक विकल्प से जुड़ी लागतों और जोखिमों की जानकारी देगा, जिसमें प्रस्तावित पृथक्करण के संबंधित स्तरों के प्रमुख कानूनी निहितार्थों का विवरण और लागू दिवालियापन विधि की जानकारी शामिल होगी।

CSDR के अंतर्गत, जिन CSDs में बैंक प्रतिभागी है, उनके अपने प्रकटीकरण दायित्व हैं। हमने इस दस्तावेज़ में उन प्रकटीकरणों के लिंक शामिल किए हैं।

2. पृष्ठभूमि

बैंक अपनी स्वयं की बहियों और अभिलेखों में प्रत्येक ग्राहक के लिए धारित प्रतिभूतियों पर उसके व्यक्तिगत अधिकार को एक पृथक ग्राहक खाते में दर्ज करता है। EEA CSD के पास ग्राहकों के लिए धारित प्रतिभूतियाँ बैंक या उसके अभिरक्षकों अथवा नामितियों के नाम पर, ग्राहक खातों के रूप में नामित खातों में रखी जाती हैं। सामान्य नियम के रूप में, बैंक EEA CSD के पास ग्राहकों को दो प्रकार के खाते उपलब्ध कराता है: व्यक्तिगत ग्राहक पृथक खाते (ISA) और सामूहिक ग्राहक पृथक खाते (OSA)।

ISA का उपयोग किसी एकल ग्राहक की प्रतिभूतियों को धारित करने के लिए किया जाता है, और इसलिए ग्राहक की प्रतिभूतियाँ अन्य ग्राहकों की प्रतिभूतियों तथा बैंक की स्वयं की पूंजी से वित्तपोषित प्रतिभूतियों से पृथक रखी जाती हैं।

OSA का उपयोग अनेक ग्राहकों की प्रतिभूतियों को सामूहिक आधार पर धारित करने के लिए किया जाता है। तथापि, बैंक OSA में अपनी स्वयं की पूंजी से वित्तपोषित प्रतिभूतियाँ धारित नहीं करता।

3. पृथक्करण के स्तरों के प्रमुख कानूनी निहितार्थ

शोधन अक्षमता (दिवालियापन)

जो प्रतिभूतियाँ बैंक ग्राहकों की ओर से सीधे CSD के पास धारण करता है, उन पर ग्राहकों का कानूनी अधिकार सामान्यतः बैंक के दिवालिया होने से प्रभावित नहीं होगा, चाहे वे प्रतिभूतियाँ ISA में धारित हों या OSA में।

दिवालियापन की स्थिति में प्रतिभूतियों का वितरण कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें से सबसे प्रासंगिक कारक नीचे रेखांकित किए गए हैं।

ग्राहकों के हितों की प्रकृति

सुरक्षित अभिरक्षा कारोबार से संबंधित आधिकारिक अपेक्षाओं के अंतर्गत बैंक के लिए यह आवश्यक है कि वह अभिरक्षा में रखी गई प्रतिभूतियों में ग्राहक की कानूनी स्थिति (वस्तुगत स्वामित्व हित) की रक्षा करे और ग्राहक की कानूनी स्थिति को अपने अधिकारों से पृथक रखे। तथापि, इन प्रतिभूतियों में ग्राहक की कानूनी स्थिति की विशिष्ट प्रकृति लागू कानून के अनुसार भिन्न हो सकती है।

जहाँ वित्तीय लिखतों में स्वामित्व अधिकारों का अस्तित्व या अंतरण, अथवा ऐसी लिखतों में अन्य अधिकार, किसी EEA सदस्य राज्य में रखे गए या स्थित रजिस्टर, खाते या केंद्रीकृत जमा प्रणाली में उनके अभिलेखन पर निर्भर करते हैं, वहाँ ये अधिकार सामान्यतः उस EEA सदस्य राज्य के कानून द्वारा शासित होंगे जहाँ वह रजिस्टर, खाता या केंद्रीकृत जमा प्रणाली, जिसमें वे अधिकार दर्ज हैं, रखी गई है या स्थित है।

बैंक की बही और अभिलेख प्रतिभूतियों में ग्राहकों के स्वामित्व-संबंधी अधिकारों (in rem) का साक्ष्य होते हैं। ऐसे साक्ष्य पर निर्भर रह सकना दिवालिया होने की स्थिति में विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा। ISA या OSA, दोनों में से किसी भी स्थिति में, दिवाला व्यवसायी उन खातों से कोई प्रतिभूति जारी किए जाने से पूर्व सभी प्रतिभूति खातों से संबंधित बही और अभिलेखों का पूर्ण मिलान अपेक्षित कर सकता है।

सुरक्षित अभिरक्षा कारोबार से संबंधित आधिकारिक अपेक्षाओं के अनुसार बैंक को सटीक बही-खाते और अभिलेख रखने होते हैं, जिनसे बैंक एक ग्राहक के लिए धारित प्रतिभूतियों को किसी अन्य ग्राहक की प्रतिभूतियों से तथा बैंक की स्वयं की प्रतिभूतियों से अलग पहचान सके। इन नियमों के अनुपालन के संबंध में बैंक का नियमित लेखा-परीक्षण भी होता है। ISA के संबंध में, प्रत्येक ग्राहक ISA में धारित सभी प्रतिभूतियों का लाभकारी हकदार होता है। OSA की स्थिति में, चूँकि प्रतिभूतियाँ एक ही खाते में सामूहिक रूप से धारित होती हैं, प्रत्येक ग्राहक को सामान्यतः खाते की सभी प्रतिभूतियों में अपनी धारित प्रतिभूतियों के अनुपात में लाभकारी हित प्राप्त माना जाता है। जब तक बही-खाते और अभिलेख लागू नियमों के अनुसार रखे जाते हैं, ग्राहकों को ISA और OSA दोनों से समान स्तर का संरक्षण प्राप्त होना चाहिए।

कमियाँ

वैधानिक अपेक्षाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक के पास प्रतिभूतियाँ मात्रा और प्रकार में कम से कम ग्राहक खातों में जमा की गई प्रतिभूतियों के बराबर हों। यदि इन अपेक्षाओं के बावजूद, बैंक जितनी प्रतिभूतियाँ ग्राहकों को सुपुर्द करने के लिए बाध्य है और बैंक उनकी ओर से ISA या OSA में जितनी प्रतिभूतियाँ धारित करता है, उनकी संख्या के बीच कमी उत्पन्न हो जाए, तो बैंक के दिवालिया होने की स्थिति में ग्राहकों को वापस की जाने वाली प्रतिभूतियाँ उनके हक़ से कम हो सकती हैं। कमी कैसे उत्पन्न हो सकती है और उसका किस प्रकार निपटारा किया जाएगा, यह ISA और OSA के बीच भिन्न हो सकता है।

कमी (शॉर्टफ़ॉल) कैसे उत्पन्न हो सकती है

कमी कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है, जिनमें प्रशासनिक त्रुटि, दिन के भीतर होने वाले उतार-चढ़ाव या प्रतिपक्षकार का चूक करना शामिल हैं, जैसे पुनःउपयोग के अधिकारों के प्रयोग के पश्चात।

अधिकांश मामलों में कमी (शॉर्टफॉल) एक बेमेल के कारण उत्पन्न होती है, अर्थात् बैंक ट्रेड की तिथि पर ही ग्राहक खातों में तत्काल जमा कर सकता है, जबकि वास्तविक सुपुर्दगी बाद में हो सकती है (EU में T+1 पर जाने की तिथि 11 अक्टूबर 2027 तक T+2; संयुक्त राज्य अमेरिका में 28 मई 2024 से T+1)। परिणामस्वरूप, प्राप्तकर्ता ग्राहक अपने प्रतिभूति खाते में प्रतिभूतियाँ जमा होते ही उनका अंतरण या विक्रय कर सकता है, चाहे बैंक को प्रतिभूतियों की सुपुर्दगी प्राप्त हो चुकी हो या नहीं। इस प्रक्रिया को संविदात्मक निपटान कहा जाता है। संविदात्मक निपटान के कारण CSD में बैंक की प्रतिभूतियों की संख्या और ग्राहकों के प्रतिभूति खातों में जमा की गई उनकी कुल संख्या के बीच अंतर आ सकता है, जो ग्राहकों के पक्ष में अधिक होती है। निपटान की सामान्य प्रक्रिया में यह अंतर निपटान चक्र के अंत में समाप्त हो जाता है। संविदात्मक निपटान बाज़ार की तरलता बढ़ाता है, सुपुर्दगी और निपटान को गति देता है, और इस तथ्य पर आधारित है कि किसी एक्सचेंज-ट्रेडेड लेनदेन का निपटान विफल होना (और परिणामस्वरूप बैंक के पास पर्याप्त उपलब्ध प्रतिभूतियाँ न होने का जोखिम) विरल है। कमी से जुड़े जोखिम को इस तथ्य से और कम किया जाता है कि यदि कोई कमी उत्पन्न होती है, तो जिस सीमा तक उपलब्ध प्रतिभूतियों की कुल संख्या ग्राहकों के खातों में जमा प्रतिभूतियों की कुल संख्या से कम हो, बैंक उस सीमा तक बिना विलंब प्रतिभूतियाँ अर्जित करने के लिए बाध्य है (नीचे देखें)।

ISA की स्थिति में, ISA में धारित प्रतिभूतियाँ केवल ISA ग्राहक द्वारा किए गए लेन-देन के निपटान हेतु ही सुपुर्द की जा सकती हैं। सिद्धांततः, इससे कमी (शॉर्टफ़ॉल) का जोखिम घट सकता है, परंतु निपटान विफलता का जोखिम बढ़ जाता है, जिसके परिणामस्वरूप अतिरिक्त लागत (जैसे बाय-इन लागत) या दंड और / या निपटान में विलंब हो सकता है, क्योंकि खाते में अपर्याप्त प्रतिभूतियाँ होने पर बैंक निपटान करने में असमर्थ होगा।

कमी का उपचार

कमी (शॉर्टफ़ॉल) के निपटान का तरीका इस पर निर्भर करते हुए भिन्न हो सकता है कि प्रतिभूतियाँ बैंक के पास ISA में रखी गई हैं या OSA में।

ISA के मामले में, संबंधित ग्राहक को किसी अन्य ग्राहक या ग्राहकों के लिए धारित खाते से उत्पन्न कमी के जोखिम में नहीं होना चाहिए। असाधारण परिस्थितियों में यह संभावना अस्वीकार नहीं की जा सकती कि किसी अन्य (ISA या OSA) खाते की कमी को ग्राहकों के बीच आनुपातिक रूप से साझा किया जाए, जिनमें वे ग्राहक भी सम्मिलित हो सकते हैं जिनका संबंधित खाते में कोई हित नहीं है। तदनुसार, जिस ग्राहक की प्रतिभूतियाँ ISA में धारित हैं, वह असाधारण मामलों में फिर भी किसी अन्य ग्राहक या ग्राहकों के लिए धारित खाते की कमी के जोखिम में आ सकता है।

ओएसए (OSA) की स्थिति में, ओएसए से संबंधित कमी को उस ओएसए में धारित प्रतिभूतियों के संबंध में ग्राहकों (और संभवतः अन्य ग्राहकों) के बीच आनुपातिक रूप से साझा किया जाएगा। अतः किसी ग्राहक को ऐसी कमी का जोखिम उठाना पड़ सकता है, भले ही प्रतिभूतियाँ उस ग्राहक से पूरी तरह असंबंधित परिस्थितियों में खो गई हों। किसी ओएसए में धारित किसी विशिष्ट प्रतिभूति की कोई भी कमी उस खाते में उस प्रतिभूति में हित रखने वाले सभी ग्राहकों के बीच आबंटित की जाती है। किसी ओएसए के संबंध में कमी में ग्राहकों के हिस्से की गणना करने के लिए, उस खाते में धारित प्रतिभूतियों के संबंध में प्रत्येक ग्राहक के हितों को बैंक की बहियों और अभिलेखों के आधार पर विधि और तथ्य के प्रश्न के रूप में स्थापित करना होगा। यह आबंटन संभवतः उस ओएसए में उस प्रतिभूति में हित रखने वाले ग्राहकों के बीच आनुपातिक रूप से किया जाएगा। फिर भी, यह तर्क दिया जा सकता है कि कुछ परिस्थितियों में किसी ओएसए में किसी विशिष्ट प्रतिभूति की कमी किसी विशेष ग्राहक या ग्राहकों के हिस्से में आनी चाहिए। इसलिए प्रत्येक ग्राहक की पात्रता की पुष्टि करना एक समय-साध्य प्रक्रिया हो सकती है। इससे प्रतिभूतियों की वापसी में विलंब हो सकता है और ग्राहक के लिए अपनी वास्तविक दिवालियापन-पात्रता के संबंध में आरंभ में अनिश्चितता उत्पन्न हो सकती है।

प्रतिभूति हित

CSD को प्रदत्त प्रतिभूति हित

जहाँ CSD को बैंक द्वारा उसके पास धारित प्रतिभूतियों (ग्राहकों के लिए धारित प्रतिभूतियों सहित) पर प्रतिभूति हित प्राप्त है (चाहे वह सांविधिक अधिकार से हो या उसके नियमों एवं शर्तों पर आधारित संविदात्मक अधिकार से), वहाँ यदि बैंक CSD के प्रति अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रहता है और प्रतिभूति हित प्रवर्तित किया जाता है, तो ग्राहक को प्रतिभूतियाँ लौटाने में विलंब (और संभावित कमी) हो सकती है। यह इस बात की परवाह किए बिना लागू होता है कि प्रतिभूतियाँ ISA में धारित हैं या OSA में। तथापि, व्यवहार में हम अपेक्षा करते हैं कि CSD बैंक के दायित्वों की पूर्ति के लिए पहले बैंक के स्वयं की पूंजी से वित्तपोषित खातों में धारित किसी भी प्रतिभूति का सहारा लेगा और उसके बाद ही ग्राहक खातों की प्रतिभूतियों का उपयोग करेगा। हम यह भी अपेक्षा करते हैं कि CSD अपने पास धारित ग्राहक खातों में अपनी प्रतिभूति आनुपातिक रूप से प्रवर्तित करेगा।

इसके अतिरिक्त, उन परिस्थितियों पर प्रतिबंध लागू होते हैं जिनमें हम ग्राहक खाते में धारित प्रतिभूतियों पर प्रतिभूति हित (सिक्योरिटी इंटरेस्ट) प्रदान कर सकते हैं।

प्रतिभूति हित (सिक्योरिटी इंटरेस्ट) तृतीय पक्ष को प्रदान किया जाता है।

ग्राहकों की प्रतिभूतियों पर प्रदत्त प्रतिभूति हित का प्रभाव ISA और OSA के मामले में भिन्न हो सकता है।

जहाँ कोई ग्राहक OSA में धारित प्रतिभूतियों में अपने हित पर प्रतिभूति हित प्रदान करने का दावा करता है और उस प्रतिभूति हित का दावा उस CSD के विरुद्ध किया जाता है जिसके पास खाता धारित है, वहाँ संबंधित खाते में प्रतिभूतियाँ धारित करने वाले सभी ग्राहकों को प्रतिभूतियों की वापसी में विलंब हो सकता है, जिनमें वे ग्राहक भी शामिल हैं जिन्होंने कोई प्रतिभूति हित प्रदान नहीं किया था (और खाते में संभावित कमी भी हो सकती है)। तथापि, व्यवहार में बैंक यह अपेक्षा करेगा कि किसी ग्राहक की प्रतिभूतियों पर प्रतिभूति हित के लाभार्थी (उदाहरणार्थ, गिरवीदार) अपनी प्रतिभूति को CSD के बजाय बैंक को सूचित करके पूर्ण करेंगे और संरक्षण को CSD के विरुद्ध नहीं, बल्कि बैंक के विरुद्ध प्रवर्तित कराने का प्रयास करेंगे, क्योंकि CSD के साथ उनका कोई संबंध नहीं होता। बैंक यह भी अपेक्षा करेगा कि CSD खाताधारक के रूप में हमारे अतिरिक्त किसी अन्य द्वारा किए गए दावे को मान्यता देने से इनकार करेंगे।

दिवाला कार्यवाही में प्राथमिकता का अधिकार

कुछ परिस्थितियों में, जहाँ बैंक ने ग्राहक खाते में धारित प्रतिभूतियों पर किसी डिपॉज़िटरी (जिसमें CSD भी सम्मिलित है) को प्रतिभूति हित प्रदान किया हो, और डिपॉज़िटरी ने अपना प्रतिभूति हित पूर्णतः या अंशतः भुना लिया हो, ग्राहकों को बैंक की दिवालिया कार्यवाही में प्राथमिकता-प्राप्त दावा हो सकता है। ऐसे प्राथमिकता अधिकार केवल सीमित परिस्थितियों में ही उत्पन्न हो सकते हैं। इसके लिए सामान्यतः यह आवश्यक होगा कि बैंक ने (i) ग्राहक को ऋण प्रदान किया हो, और (ii) ग्राहक के प्राधिकार से, हमें डिपॉज़िटरी द्वारा दिए गए ऋण के संबंध में, ग्राहक की प्रतिभूतियों पर डिपॉज़िटरी को प्रतिभूति हित प्रदान किया हो। ग्राहक के प्राथमिकता-प्राप्त दावे का निपटान सामान्य असुरक्षित लेनदारों की घोषणा से पहले तथा परिसंपत्तियों के एक पृथक समूह से अलग से किया जाएगा, जिसमें निम्नलिखित सम्मिलित हैं:

· जहाँ तक डिपॉज़िटरी ने अपने प्रतिभूति हित का प्रवर्तन नहीं किया है, वे प्रतिभूतियाँ जो उस प्रतिभूति हित के अधीन हैं जो बैंक ने डिपॉज़िटरी को प्रदान किया है;

· जहाँ निक्षेपागार ने अपने प्रतिभूति हित का प्रवर्तन कर लिया है, वहाँ कोई भी आगम जिस पर निक्षेपागार का विधिक अधिकार नहीं है;

· इस पृथक निपटान प्रक्रिया में शामिल अन्य ग्राहकों को दिए गए ऋणों से उत्पन्न होने वाले बैंक के कोई भी दावे, तथा किसी प्रतिभूति हित के आसन्न प्रवर्तन को टालने के लिए किए गए कोई भी भुगतान।

ग्राहकों को उन परिसंपत्तियों के संबंध में बैंक के दिवालियापन का दावा प्राथमिक लेनदार के रूप में करना होगा। यह प्राथमिकता निपटान प्रक्रिया तब भी उत्पन्न हो सकती है, चाहे ग्राहक के पास ISA या OSA हो अथवा नहीं।

4. CSD में सहभागिता और CSD प्रकटीकरण

किसी CSD के दिवालियापन पर लागू नियम सामान्यतः उस देश के कानूनों के अधीन होते हैं जहाँ संबंधित CSD का पंजीकृत कार्यालय स्थित है। प्रस्तावित पृथक्करण के विभिन्न स्तरों के प्रमुख कानूनी निहितार्थों तथा उन CSD पर लागू दिवालियापन कानून से संबंधित विशिष्ट जानकारी, जिनमें बैंक सहभागी है, नीचे दी गई है।

मान लीजिए कि कोई CSD अपने प्रतिभागियों को कई पृथक रूप से अलग-अलग रखे गए प्रतिभूति खाते रखने की सुविधा प्रदान करता है। ऐसी स्थिति में, बैंक लागू राष्ट्रीय कानूनी एवं विनियामक अपेक्षाओं के अनुसार यह निर्णय ले सकता है कि वह अपने ग्राहकों को CSD द्वारा उपलब्ध कराए गए पृथक रूप से अलग-अलग रखे गए प्रतिभूति खातों के प्रकारों में से केवल एक या कुछ प्रकार ही प्रदान करे। जहाँ बैंक इस विकल्प का उपयोग करता है, वहाँ अब से इसका उल्लेख किया जाएगा:

क्लियरस्ट्रीम बैंकिंग AG (CBF), जर्मनी

लिंक: https://www.clearstream.com/clearstream-en/strategy-and-initiatives/asset-safety/csdr-article-38-disclosure

मोंटे टिटोली, इटली

लिंक: https://www.lseg.com/sites/default/files/content/documents/2019_05_13%20E.6%20- %20Account%20Segregation%20Document%20FINAL_CLEAN.pdf

Euroclear, लक्ज़मबर्ग

लिंक: https://www.euroclear.com/about/en/business/Disclosuresandquestionnaires.html

यदि आप उपर्युक्त लिंक पर क्लिक करते हैं, तो आप इस जानकारी/वेबसाइट को छोड़ देते हैं। संबंधित CSD ने ये प्रकटीकरण उपलब्ध कराए हैं। बैंक ने इन प्रकटीकरणों और वेबसाइटों की न तो जाँच की है और न ही उन पर उचित परिश्रम (ड्यू डिलिजेंस) किया है, और ग्राहक CSD के प्रकटीकरणों और वेबसाइटों पर अपने जोखिम पर निर्भर करते हैं।

शब्दावली

बेल-इन से तात्पर्य उस प्रक्रिया से है, जो क्रेडिट संस्थाओं और निवेश फर्मों की पुनर्प्राप्ति एवं समाधान के लिए ढाँचा स्थापित करने वाले EU निर्देश 2014/59/EU (BRRD) को लागू करने वाले प्रयोज्य राष्ट्रीय कानून के अंतर्गत आती है, और जिसके तहत ग्राहकों के प्रति फर्म की देयताओं में संशोधन किया जा सकता है, उदाहरणार्थ उन्हें अपलिखित करके या इक्विटी में परिवर्तित करके।

केंद्रीय प्रतिभूति डिपॉज़िटरी (CSD) एक ऐसी संस्था है जो अभौतिकीकृत प्रतिभूतियों के कानूनी अधिकारों का अभिलेख रखती है और उन प्रतिभूतियों में लेनदेन के निपटान के लिए एक प्रणाली का संचालन करती है।

सेंट्रल सिक्योरिटीज़ डिपॉज़िटरीज़ रेगुलेशन (CSDR) से आशय EU विनियमन संख्या 909/2014 से है, जो यूरोपीय संघ में प्रतिभूति निपटान तथा केंद्रीय प्रतिभूति डिपॉज़िटरियों में सुधार से संबंधित है और CSD तथा उनके प्रत्यक्ष प्रतिभागियों पर लागू नियम निर्धारित करता है।

EEA का अर्थ यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र है।

व्यक्तिगत ग्राहक पृथक खाता (ISA) का उपयोग किसी एक ग्राहक की प्रतिभूतियों को धारित करने के लिए किया जाता है।

ओम्निबस क्लाइंट सेग्रीगेटेड अकाउंट (OSA) का उपयोग कई ग्राहकों की प्रतिभूतियों को सामूहिक आधार पर धारण करने के लिए किया जाता है।

प्रतिभागी का अर्थ है ऐसी संस्था जो CSD में प्रत्यक्ष प्रतिभागी है, अर्थात् ऐसी संस्था जो CSD में किसी खाते में प्रतिभूतियाँ धारण करती है और CSD के भीतर होने वाले प्रतिभूति लेन-देन के निपटान के लिए उत्तरदायी है।

प्रत्यक्ष सहभागी को अप्रत्यक्ष सहभागी से अलग समझा जाना चाहिए; अप्रत्यक्ष सहभागी वह संस्था है जो किसी CSD में अपने लिए प्रतिभूतियाँ धारण करने हेतु किसी प्रत्यक्ष सहभागी को नियुक्त करती है।

समाधान कार्यवाहियाँ वे कार्यवाहियाँ हैं जो विफल हो रहे बैंकों और निवेश फर्मों के समाधान के लिए, ऋण संस्थाओं और निवेश फर्मों की पुनर्प्राप्ति एवं समाधान हेतु ढाँचा स्थापित करने वाले EU निर्देश 2014 / 59 / EU (BRRD) को लागू करने वाले प्रयोज्य राष्ट्रीय कानून के अंतर्गत की जाती हैं